APPAREL – CLASS 9th INTRODUCTION TO AARI WORK (UNIT 2 SESSION 1)
आरी कार्य का परिचय
परिचय
आरी कार्य एक अत्यंत आकर्षक और प्रसिद्ध कढ़ाई की शैली है, जिसे विशेष रूप से भारतीय परंपरा में एक खास स्थान प्राप्त है। यह कार्य अपनी बारीकियों, चमकदार धागों और नाजुक डिजाइन के लिए जाना जाता है। आरी कार्य को ‘अड्डा कढ़ाई’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह लकड़ी के अड्डे (फ्रेम) पर किया जाता है।
आरी कार्य का इतिहास और उत्पत्ति
आरी कार्य का इतिहास बहुत पुराना है। यह कार्य भारत में मुग़ल काल से ही प्रचलित हुआ और राजदरबारों में विशेष महत्व रखता था। शाही वस्त्रों, दरबार की सजावट, परदे, राजसी बिस्तर और ओढ़नी पर इस कला का प्रयोग किया जाता था।
मुग़ल शासक अपने परिधानों में सोने–चाँदी के धागों से बनी आरी कढ़ाई का प्रयोग करते थे।
समय के साथ यह कला लखनऊ, दिल्ली, आगरा और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में खूब विकसित हुई।
आज भी आरी कार्य को आधुनिक फैशन जगत में उच्च स्थान प्राप्त है।
आरी या अड्डे का कार्य
आरी कार्य विशेष प्रकार के फ्रेम (अड्डा) पर किया जाता है। यह लकड़ी का बना होता है और उस पर कपड़ा मजबूती से तानकर लगाया जाता है। अड्डे पर बैठकर कारीगर घंटों तक कढ़ाई करते हैं।
अड्डे पर कपड़े को कसकर बांध दिया जाता है।
आरी नामक सुई का उपयोग करके धागे को कपड़े पर डिजाइन के अनुसार चलाया जाता है।
यह सुई साधारण सुई से अलग होती है और इसमें हुक (कुंडल) होता है।
जरदोजी या जारी का कार्य
जरदोजी कढ़ाई आरी कार्य का ही एक विशेष रूप है। इसमें सोने–चाँदी के तारों और चमकीले धागों का प्रयोग होता है।
शाही काल में जरदोजी का उपयोग शाही पोशाकों और दरबारी वस्त्रों में होता था।
इसमें धातु के तारों को मोतियों, सितारों और नगों के साथ मिलाकर कढ़ाई की जाती है।
आजकल जरदोजी कार्य शादी और उत्सवों के परिधानों पर बहुत लोकप्रिय है।
कामदानी
कामदानी आरी कार्य की ही एक सूक्ष्म शैली है। इसमें सोने–चाँदी के तारों से महीन और जालीनुमा डिजाइन बनाए जाते हैं। यह कार्य विशेष रूप से ओढ़नी, दुपट्टों और साड़ियों पर किया जाता है।
आरी कार्य के लिए प्रयुक्त उपकरण और सामग्री
1. अड्डा (लकड़ी का फ्रेम): कपड़े को कसकर लगाने और स्थिर रखने के लिए।
2. आरी (सुई): विशेष हुक वाली सुई जिससे कढ़ाई की जाती है।
3. कैंची: धागे काटने के लिए।
4. सुई और अंगुश्तान: सहायक उपकरण, सुई धागे के काम और अंगुश्तान उंगलियों की सुरक्षा हेतु।
5. सोने और चांदी के धागे: कढ़ाई को आकर्षक और चमकदार बनाने के लिए ।
6. धातु के तार (दबका और सितारा): उभार और चमक पैदा करने के लिए।
7. करदाना और पोत के मोती: सजावट हेतु।
8. चमकदार नग (स्टोन्स): डिजाइन को आकर्षक बनाने के लिए।
9. खड़िया (चाक पाउडर): डिजाइन को कपड़े पर उतारने के लिए।
10. कढ़ाई के धागे (रेशमी, सूती, ऊनी): डिजाइन की विविधता के लिए।
महत्व
- आरी कार्य भारत की पारंपरिक कढ़ाई की एक अनमोल धरोहर है।
- यह आज भी फैशन और परिधान उद्योग में उच्च मांग रखता है।
- कारीगरों के लिए यह रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है।
- आधुनिक डिजाइनों और फ्यूजन परिधानों में आरी कार्य का नया स्वरूप दिखाई देता है।
✦ प्रश्न–उत्तर
प्र.1. आरी कार्य को अड्डा कार्य क्यों कहा जाता है?
उ. आरी कार्य लकड़ी के अड्डे पर किया जाता है, जिसमें कपड़े को कसकर लगाया जाता है। इसलिए इसे अड्डा कार्य कहते हैं।
प्र.2. जरदोजी कढ़ाई क्या है?
उ. जरदोजी कढ़ाई आरी कार्य का एक रूप है जिसमें सोने–चाँदी के धागे, तार और मोती आदि का प्रयोग कर शानदार कढ़ाई की जाती है।
प्र.3. आरी कार्य के लिए प्रयुक्त दो प्रमुख उपकरणों के नाम लिखिए।
उ. अड्डा (लकड़ी का फ्रेम) और आरी (सुई)।
प्र.4. कामदानी कार्य का उपयोग कहाँ किया जाता है?
उ. कामदानी कार्य ओढ़नी, दुपट्टों और साड़ियों पर महीन डिजाइन बनाने के लिए किया जाता है।
प्र.5. आरी कार्य का इतिहास किस काल से जुड़ा है?
उ. आरी कार्य का इतिहास मुग़ल काल से जुड़ा है। उस समय यह शाही परिधानों और दरबारी सजावट का हिस्सा था।
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